युवा मार्गदर्शक और किशोर पठन कार्यक्रम: बच्चों के भविष्य को बदलने का अचूक मंत्र

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청소년지도사와 청소년 독서 프로그램 - **"A modern, diverse teenager (around 16 years old, casually dressed in jeans and a t-shirt) comfort...

नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों! आजकल हमारे किशोरों को देखकर मुझे अक्सर लगता है कि डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में वे कहीं पढ़ने की अपनी अनमोल आदत तो नहीं खो रहे?

एक युवा मार्गदर्शक के तौर पर मेरा अनुभव कहता है कि सही पठन कार्यक्रम उन्हें सिर्फ़ अक्षरों की पहचान नहीं कराते, बल्कि एक नई दुनिया का दरवाज़ा खोलते हैं। मैंने खुद देखा है कि कैसे एक अच्छी किताब बच्चों के सोचने के तरीक़े, उनकी कल्पना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ा सकती है। यह सिर्फ़ पढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सीख है जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती है। तो क्या आप भी जानना चाहते हैं कि कैसे हम अपने युवाओं को पढ़ने की इस जादुई दुनिया से जोड़ सकते हैं?

आइए, इस बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करते हैं!

नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों! आजकल हमारे किशोरों को देखकर मुझे अक्सर लगता है कि डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में वे कहीं पढ़ने की अपनी अनमोल आदत तो नहीं खो रहे?

एक युवा मार्गदर्शक के तौर पर मेरा अनुभव कहता है कि सही पठन कार्यक्रम उन्हें सिर्फ़ अक्षरों की पहचान नहीं कराते, बल्कि एक नई दुनिया का दरवाज़ा खोलते हैं। मैंने खुद देखा है कि कैसे एक अच्छी किताब बच्चों के सोचने के तरीक़े, उनकी कल्पना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ा सकती है। यह सिर्फ़ पढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सीख है जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती है। तो क्या आप भी जानना चाहते हैं कि कैसे हम अपने युवाओं को पढ़ने की इस जादुई दुनिया से जोड़ सकते हैं?

आइए, इस बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करते हैं!

डिजिटल युग में पढ़ने का अनमोल महत्व

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आज के समय में जब हर हाथ में स्मार्टफोन है और मनोरंजन के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं, तो बच्चों को किताबों की तरफ़ मोड़ना एक चुनौती लग सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि यही वो समय है जब पढ़ने की आदत की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। आप सोचिए, सोशल मीडिया पर बस कुछ सेकंड की जानकारी मिलती है, जो हमें सतही ज्ञान देती है। इसके उलट, जब हम कोई किताब पढ़ते हैं, तो हमारा दिमाग़ गहरा सोचता है, विश्लेषण करता है और चीज़ों को एक अलग नज़रिए से देखता है। यह सिर्फ़ जानकारी हासिल करना नहीं है, बल्कि विचारों को विकसित करना है, जो आज के युवाओं के लिए बेहद ज़रूरी है। मैंने खुद देखा है कि जो बच्चे नियमित रूप से पढ़ते हैं, वे स्कूल में ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। उनकी शब्दावली मज़बूत होती है, वे अपनी बातों को ज़्यादा स्पष्टता से रख पाते हैं और उनकी कल्पना शक्ति भी कमाल की होती है। एक रिसर्च में भी यह बात सामने आई है कि पढ़ने वाले बच्चे मुश्किल परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले पाते हैं और उनमें समस्या-समाधान की क्षमता भी अधिक होती है। यह सब देखकर मुझे सच में लगता है कि आज भी किताब की जगह कोई गैजेट नहीं ले सकता। यह उन्हें सिर्फ़ किताबी कीड़ा नहीं बनाता, बल्कि एक संपूर्ण इंसान बनने में मदद करता है।

तकनीक के साथ पढ़ाई का तालमेल

यह समझना ज़रूरी है कि तकनीक हमारी दुश्मन नहीं, बल्कि एक सहायक हो सकती है। आज ई-बुक्स, ऑडियोबुक्स और डिजिटल लाइब्रेरी जैसे कई विकल्प मौजूद हैं जो बच्चों को पढ़ने के नए तरीक़े प्रदान करते हैं। मेरा अनुभव कहता है कि अगर हम इन माध्यमों को सही तरीक़े से इस्तेमाल करें, तो यह बच्चों की पढ़ने की रुचि बढ़ा सकते हैं। जैसे, कुछ बच्चों को लंबी किताबें पढ़ने में आलस आता है, लेकिन ऑडियोबुक से वे कहानी को सुनकर भी पूरा कर सकते हैं।

मनोरंजन और ज्ञान का संगम

मुझे याद है जब मैं छोटा था, तो कॉमिक्स और कहानियों की किताबें मेरी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थीं। आज भी वही सिद्धांत काम करता है। बच्चों को ऐसी किताबें देनी चाहिए जो उन्हें पसंद हों, भले ही वह फिक्शन हो, विज्ञान पर आधारित हो या यात्रा वृत्तांत। जब उन्हें पढ़ने में मज़ा आएगा, तो वे खुद-ब-खुद इसकी तरफ़ खिंचे चले आएंगे और यह सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि अनजाने में बहुत कुछ सिखा भी जाएगा।

किशारों के लिए आकर्षक पठन कार्यक्रम

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आजकल किशोरों को आकर्षित करना कोई आसान काम नहीं है, ख़ासकर जब बात पढ़ाई की हो। इसलिए हमें पारंपरिक तरीक़ों से हटकर कुछ नया और रोमांचक सोचना होगा। मेरा अनुभव कहता है कि अगर हम पढ़ने को एक बोझ की तरह न देखकर, एक खेल या एक एडवेंचर की तरह पेश करें, तो वे ज़रूर दिलचस्पी लेंगे। यह सिर्फ़ उन्हें कुछ किताबें पढ़ने के लिए मजबूर करना नहीं है, बल्कि उनके भीतर पढ़ने के प्रति एक जुनून जगाना है। मैंने कई जगहों पर देखा है कि जब बच्चे अपने दोस्तों के साथ मिलकर किसी किताब पर चर्चा करते हैं या उस पर आधारित कोई छोटा सा नाटक करते हैं, तो वे उस किताब से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। इससे उनकी समझ भी बढ़ती है और साथ ही उनका सामाजिक कौशल भी विकसित होता है। हमें ऐसे पठन कार्यक्रम बनाने होंगे जो उनकी उम्र और रुचियों के अनुकूल हों, जहाँ उन्हें अपनी पसंद की किताबें चुनने की आज़ादी मिले और उन्हें यह महसूस न हो कि यह कोई ‘होमवर्क’ है।

रुचि के अनुसार किताबों का चुनाव

सच कहूँ तो, हर बच्चे की पसंद अलग होती है। किसी को विज्ञान-फाई पसंद है, तो किसी को रहस्य-रोमांच, और किसी को जीवनियाँ। हमें उन्हें ज़बरदस्ती कोई एक शैली पढ़ने के लिए नहीं कहना चाहिए। उन्हें अपनी पसंद की किताबें चुनने दें। मैं हमेशा अपने आस-पास के युवाओं से कहता हूँ कि पहले वो किताब पकड़ो जो तुम्हें अपनी तरफ़ खींचती है, फिर देखना कि कैसे तुम उसकी दुनिया में खो जाओगे। जब पढ़ने में मज़ा आता है, तभी वो आदत बनती है, वरना बस एक काम बनकर रह जाता है।

समूह चर्चा और बुक क्लब का महत्व

मैंने खुद देखा है कि जब बच्चे एक साथ बैठकर किसी किताब पर चर्चा करते हैं, तो उनके विचार ज़्यादा खुलते हैं। बुक क्लब बनाना एक बेहतरीन तरीक़ा है। यहाँ बच्चे न सिर्फ़ किताब पढ़ते हैं, बल्कि अपने विचारों को साझा करते हैं, दूसरों के दृष्टिकोण को समझते हैं और अपनी बात रखना सीखते हैं। यह उन्हें सामाजिक रूप से भी विकसित करता है और पढ़ने को एक सामाजिक गतिविधि बनाता है, न कि सिर्फ़ अकेले में की जाने वाली चीज़।

माता-पिता और मार्गदर्शकों की भूमिका

मुझे लगता है कि हम माता-पिता और बड़े भाई-बहनों या शिक्षकों की ज़िम्मेदारी बहुत अहम है। हम सिर्फ़ बच्चों को किताबें लाकर दे दें, इससे बात नहीं बनेगी। हमें खुद भी उनके सामने एक अच्छा उदाहरण पेश करना होगा। अगर वे हमें पढ़ते हुए देखेंगे, तो उनमें भी पढ़ने की जिज्ञासा जागेगी। मेरा मानना है कि घर में एक ऐसा माहौल बनाना ज़रूरी है जहाँ पढ़ाई को महत्व दिया जाए, जहाँ किताबें हर तरफ़ नज़र आएँ और जहाँ पढ़ने को लेकर सहज बातचीत हो। यह सिर्फ़ पढ़ाई का समय तय करना नहीं है, बल्कि पढ़ने को परिवार का हिस्सा बनाना है। मैंने अपने भतीजे-भतीजी के साथ यही किया है; जब वे मुझे पढ़ते हुए देखते हैं, तो खुद-ब-खुद पूछते हैं, “आप क्या पढ़ रहे हो?” और धीरे-धीरे वे भी अपनी किताब लेकर बैठ जाते हैं। यह एक छोटी सी शुरुआत होती है जो एक बड़ी आदत में बदल जाती है।

पढ़ने का माहौल तैयार करना

घर में एक शांत और आरामदायक कोना बनाना जहाँ बच्चे आराम से बैठकर पढ़ सकें, बहुत ज़रूरी है। यह उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। लाइब्रेरी जाना, बुकस्टोर घूमना, ये सब गतिविधियाँ बच्चों को किताबों की दुनिया से जोड़ती हैं और उन्हें पढ़ने के लिए उत्साहित करती हैं।

एक साथ पढ़ने का आनंद

कभी-कभी बच्चों के साथ बैठकर उन्हीं की पसंदीदा किताब पढ़ना, उनके लिए एक यादगार अनुभव हो सकता है। इससे न सिर्फ़ उनके साथ आपका रिश्ता मज़बूत होता है, बल्कि उन्हें भी पढ़ने में ज़्यादा मज़ा आता है। आप उन्हें कहानी पढ़कर सुना सकते हैं या कुछ देर वे पढ़ें और कुछ देर आप। यह उन्हें पढ़ने की आदत डालने में मदद करता है।

विभिन्न शैलियों और माध्यमों की खोज

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청소년지도사와 청소년 독서 프로그램 - **"A vibrant and engaging scene of four diverse teenagers (aged 15-17, dressed in contemporary, mode...
यह सुनकर शायद आपको हैरानी होगी, लेकिन आजकल के किशोर सिर्फ़ कहानियाँ नहीं पढ़ना चाहते। उनकी रुचियाँ बहुत विविध हैं। हमें उन्हें अलग-अलग शैलियों, जैसे विज्ञान, इतिहास, बायोग्राफी, यात्रा वृत्तांत, यहाँ तक कि कविताएँ और नाटक भी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। मेरा अनुभव कहता है कि जितने ज़्यादा प्रकार की किताबें वे पढ़ेंगे, उतनी ही उनकी समझ विकसित होगी और उन्हें नए विचार मिलेंगे। कई बार बच्चे किसी एक तरह की किताब में अटक जाते हैं और फिर ऊब जाते हैं। उन्हें यह दिखाना ज़रूरी है कि पढ़ने की दुनिया कितनी विशाल और रंगीन है। ऑनलाइन ब्लॉग्स, मैग्ज़ीन्स और अख़बार भी पढ़ने के अच्छे स्रोत हैं। महत्वपूर्ण यह है कि वे कुछ भी पढ़ें, जो उन्हें सोचने और समझने पर मजबूर करे।

ज्ञानवर्धक और मनोरंजक सामग्री का मिश्रण

पढ़ने का मतलब सिर्फ़ अकादमिक किताबें नहीं होता। उन्हें ऐसी किताबें भी देनी चाहिए जो उन्हें जीवन के बारे में सिखाती हैं, प्रेरणा देती हैं या उन्हें किसी नई चीज़ से परिचित कराती हैं। जैसे, किसी महान वैज्ञानिक की जीवनी या किसी रोमांचक खोज की कहानी उन्हें बहुत कुछ सिखा सकती है।

डिजिटल माध्यमों का स्मार्ट उपयोग

ई-बुक्स, ऑडियोबुक्स, पोडकास्ट और शैक्षिक ऐप्स भी पढ़ने के नए और आधुनिक तरीक़े हैं। हमें बच्चों को इनका सही इस्तेमाल सिखाना चाहिए। यह उन्हें हर जगह पढ़ने की सुविधा देते हैं, चाहे वे सफ़र में हों या घर पर।

पढ़ने के दीर्घकालिक लाभ

जब हम बच्चों में पढ़ने की आदत डालते हैं, तो हम सिर्फ़ उन्हें अच्छी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर रहे होते, बल्कि हम उन्हें जीवन भर के लिए एक अनमोल उपहार दे रहे होते हैं। मेरा अनुभव कहता है कि पढ़ने वाले बच्चे न केवल स्कूल में अच्छे नंबर लाते हैं, बल्कि वे ज़्यादा आत्मविश्वास वाले, ज़्यादा रचनात्मक और बेहतर समस्या-समाधान करने वाले इंसान बनते हैं। यह सिर्फ़ परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू को बेहतर बनाता है। यह उनकी भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) को बढ़ाता है, उन्हें दूसरों की भावनाओं को समझने में मदद करता है और उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाता है। पढ़ने से दिमाग़ की कसरत होती है, याददाश्त तेज़ होती है और एकाग्रता बढ़ती है, जो आज के विकर्षण भरे युग में बहुत ज़रूरी है। यह उनके भविष्य के करियर में भी सहायक होता है, क्योंकि अच्छी संचार क्षमता और ज्ञान हर जगह काम आता है। मुझे लगता है कि यह सबसे महत्वपूर्ण निवेश है जो हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए कर सकते हैं।

लाभ का क्षेत्र विवरण किशोरों पर प्रभाव
शब्दावली और संचार नई शब्द सीखते हैं, विचारों को स्पष्टता से व्यक्त करते हैं। बेहतर लेखन और बोलने का कौशल, आत्मविश्वास बढ़ता है।
कल्पना और रचनात्मकता अलग-अलग दुनियाओं की कल्पना करते हैं, नए विचार उत्पन्न करते हैं। समस्या-समाधान की क्षमता बढ़ती है, कलात्मक रुचियाँ विकसित होती हैं।
ज्ञान और जागरूकता अलग-अलग विषयों पर जानकारी प्राप्त करते हैं, दुनिया को समझते हैं। सामान्य ज्ञान बढ़ता है, विभिन्न संस्कृतियों के प्रति समझ विकसित होती है।
एकाग्रता और अनुशासन लंबी अवधि तक ध्यान केंद्रित करना सीखते हैं। पढ़ाई और अन्य कार्यों में बेहतर प्रदर्शन, धैर्य बढ़ता है।
भावनात्मक बुद्धिमत्ता किरदारों के अनुभवों से भावनाओं को समझते हैं, सहानुभूति बढ़ती है। दूसरों को बेहतर समझते हैं, सामाजिक संबंधों में सुधार होता है।

आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास

जब बच्चे ज़्यादा पढ़ते हैं, तो उनका ज्ञान बढ़ता है और वे दुनिया के बारे में ज़्यादा जानते हैं। यह ज्ञान उन्हें आत्मविश्वास देता है। वे किसी भी विषय पर बात कर सकते हैं, अपनी राय रख सकते हैं और नए विचारों को स्वीकार कर सकते हैं। यह उनके व्यक्तित्व को निखारता है और उन्हें एक प्रभावशाली इंसान बनाता है।

भविष्य के लिए तैयारी

आज की दुनिया में सफल होने के लिए सिर्फ़ किताबी ज्ञान काफ़ी नहीं है। रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, संचार कौशल – ये सब बहुत ज़रूरी हैं। पढ़ना इन सभी कौशलों को विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीक़ा है। यह उन्हें कॉलेज और करियर, दोनों के लिए तैयार करता है।

글 को अलविदा कहते हुए

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तो मेरे प्यारे दोस्तों, आपने देखा कि कैसे डिजिटल क्रांति के इस युग में भी पढ़ने की आदत हमारे किशोरों के लिए कितनी अमूल्य है। यह सिर्फ़ अक्षर ज्ञान नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण है, जो उन्हें भविष्य की हर चुनौती के लिए तैयार करता है। मेरा अनुभव कहता है कि अगर हम सही तरीक़े से इस बीज को बोते हैं, तो यह एक विशाल ज्ञान के वृक्ष में बदल जाएगा। आइए, हम सब मिलकर अपने बच्चों को इस जादुई दुनिया से जोड़ें और उन्हें जीवन का सबसे बड़ा उपहार दें – पढ़ने का आनंद। यह सफर शायद मुश्किल लगे, पर यकीन मानिए, इसके नतीजे हमेशा मीठे होंगे।

जानने योग्य उपयोगी जानकारी

1. घर पर एक छोटा सा ‘रीडिंग कॉर्नर’ बनाएँ। यह आरामदायक और शांत जगह हो, जहाँ बच्चे बिना किसी रुकावट के पढ़ सकें। वहाँ कुछ किताबें, एक अच्छी कुर्सी और पढ़ने के लिए पर्याप्त रोशनी ज़रूर रखें। मैंने खुद देखा है कि ऐसी जगह बच्चों को अपनी ओर खींचती है और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

2. बच्चों को उनकी उम्र और रुचि के अनुसार किताबें चुनने की पूरी आज़ादी दें। चाहे वह कॉमिक्स हो, साइंस फिक्शन, रहस्य कथाएँ, या ऐतिहासिक उपन्यास। जब उन्हें अपनी पसंद की किताब मिलती है, तो वे उसे ज़्यादा मन लगाकर पढ़ते हैं। ज़बरदस्ती किसी शैली को थोपने से अक्सर वे पढ़ने से दूर भागने लगते हैं।

3. डिजिटल संसाधनों का स्मार्ट तरीके से उपयोग करें। ई-बुक्स, ऑडियोबुक्स और शैक्षिक ऐप्स आजकल बहुत लोकप्रिय हैं। ये बच्चों को पढ़ने के नए और इंटरैक्टिव तरीके प्रदान करते हैं। आप उन्हें लाइब्रेरी ऐप डाउनलोड करने या कुछ अच्छी ऑडियोबुक सुनने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। यह तकनीक को दोस्त बनाने जैसा है।

4. एक ‘बुक क्लब’ या ‘रीडिंग चैलेंज’ शुरू करें। दोस्तों या परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर एक किताब पढ़ें और फिर उस पर चर्चा करें। इससे पढ़ने में मज़ा आता है और विचारों का आदान-प्रदान भी होता है। मेरे भतीजे-भतीजी तो हर हफ़्ते एक नई किताब का लक्ष्य रखते हैं, और फिर एक-दूसरे को बताते हैं कि उन्हें क्या पसंद आया। यह उन्हें प्रेरित रखता है!

5. माता-पिता और अभिभावक खुद भी पढ़ने का उदाहरण पेश करें। जब बच्चे आपको पढ़ते हुए देखते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से प्रेरणा महसूस करते हैं। घर में पढ़ने का माहौल बनाएँ जहाँ किताबों को महत्व दिया जाए। आप कभी-कभी अपने बच्चे के साथ बैठकर उनकी किताब पढ़ सकते हैं, या उन्हें अपनी पसंदीदा कहानी सुना सकते हैं। यह उन्हें पढ़ने के लिए उत्साहित करता है और पारिवारिक बंधन को भी मज़बूत करता है।

मुख्य बातों का सारांश

सारांश में, यह स्पष्ट है कि डिजिटल युग में किशोरों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना केवल एक शैक्षिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है। हमें यह समझना होगा कि किताबों और गैजेट्स के बीच एक संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है, और हम तकनीक को दुश्मन नहीं, बल्कि एक सहायक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। मैंने अपने अनुभव से यह महसूस किया है कि जब बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार पढ़ने की स्वतंत्रता मिलती है और उन्हें एक सहायक माहौल प्रदान किया जाता है, तो वे स्वाभाविक रूप से पढ़ने की ओर आकर्षित होते हैं। माता-पिता और मार्गदर्शकों की भूमिका यहाँ सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बच्चों के सामने एक उदाहरण पेश करते हैं और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। हमें विभिन्न शैलियों और माध्यमों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि ज्ञान की दुनिया बहुत विशाल है। अंततः, पढ़ने की आदत से किशोरों में आत्मविश्वास, संचार कौशल, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है, जो उन्हें अकादमिक सफलता के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए तैयार करती है। यह उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖

प्र: मेरे किशोर बच्चे को स्क्रीन से हटाने और पढ़ने की ओर आकर्षित करने के लिए मैं क्या कर सकती हूँ? मुझे लगता है कि वे किताबों से ज़्यादा फ़ोन या टैबलेट पर ही रहते हैं।

उ: अरे वाह! यह तो आजकल लगभग हर घर की कहानी है, है ना? मैं आपकी परेशानी समझ सकती हूँ। मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है कि कैसे बच्चे गैजेट्स में खोए रहते हैं। लेकिन घबराइए नहीं, हमें बस थोड़ी समझदारी और प्यार से काम लेना होगा। सबसे पहले, सीधा टकराव टालिए। जब मैंने अपने भतीजे-भतीजी पर दबाव डाला था, तो वे और भी ज़्यादा जिद्दी हो गए थे। इसके बजाय, उन्हें चुनने का मौका दें। पता लगाइए कि उन्हें किस चीज़ में रुचि है – शायद रहस्य कथाएँ, विज्ञान फंतासी, या फिर किसी खेल हस्ती की जीवनी?
आजकल ग्राफिक नॉवेल्स और ऑडियोबुक्स भी बहुत चलन में हैं, ये भी पढ़ने की शुरुआत करने का एक बेहतरीन तरीका हैं। सबसे ज़रूरी बात, उन्हें लाइब्रेरी या बुक स्टोर ले जाइए। जब वे खुद अपनी पसंद की किताब चुनेंगे, तो उसे पढ़ने में उनकी दिलचस्पी कई गुना बढ़ जाएगी। और हाँ, खुद भी उनके सामने किताब पढ़िए!
बच्चे देखकर सीखते हैं, और जब वे आपको पढ़ते देखेंगे, तो उन्हें लगेगा कि पढ़ना कोई बोरिंग काम नहीं, बल्कि मज़ेदार और कूल है। मेरे एक दोस्त ने अपने बेटे के साथ हर रात 15 मिनट साथ में पढ़ने का नियम बनाया और यकीन मानिए, अब वो लड़का अपने आप किताबें उठा लेता है।

प्र: आजकल के किशोरों के लिए किस तरह की किताबें सबसे अच्छी रहती हैं, जो उन्हें वाकई पसंद आएं और उनका मन लगा रहे?

उ: यह सवाल तो बहुत ही बढ़िया है! आजकल के बच्चों की पसंद बहुत बदल गई है, और पुरानी कहानियों से उन्हें जोड़ना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। मेरे अनुभव में, सबसे अच्छी किताबें वो होती हैं जो उनकी दुनिया से जुड़ी हों या उन्हें एक नई और रोमांचक दुनिया में ले जाएं। एक्शन और एडवेंचर से भरपूर उपन्यास, जैसे कि ‘हैरी पॉटर’ सीरीज़ या ‘द हंगर गेम्स’ जैसी किताबें उन्हें पलक झपकने का भी मौका नहीं देतीं। इसके अलावा, आजकल के युवा अपनी पहचान और भावनाओं को समझने में लगे रहते हैं, तो ऐसी किताबें जो किशोर जीवन की चुनौतियों, दोस्ती, प्यार और अपनी पहचान खोजने की कहानियाँ सुनाती हैं, उन्हें बहुत पसंद आती हैं। ऐतिहासिक फिक्शन या विज्ञान पर आधारित सरल किताबें भी उनकी जिज्ञासा जगा सकती हैं। और हाँ, अगर आपका बच्चा किसी ख़ास विषय, जैसे अंतरिक्ष, जानवर या खेल में रुचि रखता है, तो उस विषय पर आधारित नॉन-फिक्शन किताबें भी कमाल कर सकती हैं। याद रखिए, लक्ष्य उन्हें पढ़ने का आनंद दिलाना है, किसी खास किताब को उन पर थोपना नहीं। मैंने कई बार देखा है कि एक बार जब वे अपनी पसंदीदा शैली खोज लेते हैं, तो वे खुद ही अगली किताब की तलाश में निकल पड़ते हैं!

प्र: माता-पिता के रूप में, हम घर पर ऐसा माहौल कैसे बना सकते हैं जिससे बच्चे में पढ़ने की आदत को बढ़ावा मिले?

उ: माता-पिता के रूप में, आप एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और मुझे लगता है कि यह सबसे असरदार तरीका है! मैंने अपने कई फॉलोअर्स को यही सलाह दी है और उन्हें बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं। सबसे पहले, घर में एक ‘रीडिंग कॉर्नर’ बनाइए। यह कोई बहुत बड़ी जगह नहीं, बस एक आरामदायक कुर्सी, अच्छी रोशनी और कुछ किताबें रखने की जगह हो सकती है। इसे इतना आकर्षक बनाइए कि बच्चे खुद-ब-खुद वहाँ समय बिताना चाहें। दूसरा, ‘फैमिली रीडिंग टाइम’ शुरू करें। हफ्ते में एक या दो बार, पूरे परिवार के साथ मिलकर थोड़ी देर के लिए किताबें पढ़ें, चाहे सब अपनी-अपनी किताब पढ़ें या आप उन्हें पढ़कर सुनाएं। इससे बच्चों को लगेगा कि पढ़ना कोई काम नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताया जाने वाला सुखद समय है। तीसरा, किताबों को आसानी से उपलब्ध कराएँ। घर में अलग-अलग तरह की किताबें रखें, जो उनकी उम्र और रुचि के हिसाब से हों। जब मैंने अपने घर में हर कमरे में कुछ किताबें रखीं, तो मेरे छोटे भाई-बहनों ने अनजाने में ही उन्हें उठाना शुरू कर दिया था। और हाँ, सबसे ज़रूरी बात – उनके साथ किताबों के बारे में बात करें!
उन्हें कहानियाँ सुनाएं, उनसे पूछें कि उन्हें क्या पसंद आया, क्या नहीं। जब आप उनकी राय को महत्व देंगे, तो वे और ज़्यादा जुड़ेंगे। छोटे-छोटे कदम उठाएँ और धैर्य रखें, क्योंकि एक अच्छी आदत बनने में थोड़ा समय तो लगता ही है!

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